Thursday, June 20, 2013

जो स्वर्गों में बने हैं बाँध, उनपर हैं बड़े पहरे 
तुम्हारे और हमारे सब अँधेरे हैं वहीँ ठहरे 
न मानो तुम मगर, सब उनके सच भी हैं बड़े नंगे 
ये बूँदें उनके लोहू की नयी रिसती नुमाइश है 

किसी बारिश में तुम भींगो,
तो रुक कर सोचना एक पल
कि किन सदियों की बूँदें हैं
ये किस मौसम की बारिश है

Friday, June 14, 2013

डर

तब सबसे बड़े डर वे थे 
जिनमें धरती फट जाती 
और हम खड़े होते दोनों किनारों पर -
बस इतना याद है 
कि तब हमें किस चीज से डर लगा था 
हमारे आने वाले डर अजनबी हैं

Tuesday, June 4, 2013

ख़ुशी और जीत

खलिहानों में अंतड़ियाँ 
भूखी हैं , पर वीरान नहीं ,
रोटियों की कीमतें चढ़ गयीं हैं 
पर भूख में इतनी जान नहीं -
सुनते हैं,जो भी एवेरेस्ट पर चढ़ा ,
अकेलेपन से मर गया

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