Thursday, February 21, 2008

राम नही बसते धरती के मंदिर और शिवालो में
या चन्दन टीका करके बस भोग लगाने वालो में
वे मर्यादा की प्रधानता का प्रतीक हैं , संबल है
उन हृदयों में राम बसें ,जो प्रेम भाव से विह्वल हैं
-आलोक

2 comments:

bhawna....anu November 2, 2008 at 9:55 AM  

simply superb!
ye mujhe bahut pehle se hi likhna tha par aaj likh paa rhi huin.
sunder lekhan aur sunder chintan.
shubhkaamnaayen.

पंकज June 9, 2009 at 3:58 AM  

बहुत ही सुन्दर शब्द हैं ये

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