Thursday, October 9, 2008

उस दिन

और उस दिन
हम दोनों के दिल
नदी में बहती हुई
दो बड़ी बड़ी बूँदें थीं
इतनी पारदर्शी
कि
कुछ भी न दिखाई पड़ता था
उनके भीतर

1 comments:

Amit K. Sagar October 31, 2008 at 10:52 PM  

बस लिखते रहिये.
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मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
शुक्रिया.

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